Tuesday, March 31, 2015

koi or baat hai..




Mehfil101





koi or baat hai..



ना ग्रहण जैसा कुछ है….ना अमावस की रात है…

उस पर भी चाँद..गायब..

बादल मे छुपा है…या कोई… और बात है..

ना वो आये…ना उनका खत…ना किसी पैगाम..का अंदेशा…

कोई और साथ है…या कोई.. और बात है..

शोर बहुत होता है…इस शहर में..तुम्हारे…

सब आबाद हैं…बरबाद हैं…या कोई..और बात है..

हर मन्नत…हसरत…और..शिद्दत से..उसे चाहा…

मगर वो मिल नही सकता…

ये उसकी ख्वाहिश है….जमाने की साजिश है…या कोई…और बात है…

तुम्हारी आवाज का हर दर्द…दुर..मीलों दुर…सुनता हुँ…

तबियत खराब है…खुदा नाराज है…या कोई…और बात है…

ईश्क की राहों पर…पसरा क्यों है सन्नाटा…

सब मर गये…सुधर गये…या कोई…और बात है…


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